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Surrey Mandir #BhaiJiHamumanParshadPoddar

श्रीभाईजीके नित्य स्मरणीय अमृत वचन

*५ दिसंबर*

जब तक तुम्हारा मुख भोगों की ओर है, तब तक तुम्हारा एक पग भी आगे चलना भोगों की ओर ही होता है, भगवान की और नहीं।

*पूज्य "भाईजी" श्रीहनुमानप्रसादजी पोद्दार*

गीतावाटिका प्रकाशन
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Surrey Mandir #BhaiJiHamumanParshadPoddar 

श्रीभाईजीके नित्य स्मरणीय अमृत वचन 

*५ दिसंबर*

जब तक तुम्हारा मुख भोगों की ओर है, तब तक तुम्हारा एक पग भी आगे चलना भोगों की ओर ही होता है, भगवान की और नहीं।

*पूज्य भाईजी श्रीहनुमानप्रसादजी पोद्दार*

गीतावाटिका प्रकाशन

Surrey Mandir. "भक्ता कांता बाई"

वृन्दावन में बिहारी जी की अनन्य भक्त थी। नाम था कांता बाई। बिहारी जी को अपना लाला कहा करती थी। उन्हें लाड दुलार से रखा करतीं और दिन रात उनकी सेवा में लीन रहती थी। क्या मजाल कि उनके लल्ला को जरा भी तकलीफ हो जाए?

एक दिन की बात है कांता बाई अपने लल्ला को विश्राम करवा कर खुद भी तनिक देर विश्राम करने लगीं तभी उसे जोर से हिचकियाँ आने लगीं और वो इतनी बेचैन हो गयी कि उसे कुछ भी नहीं सूझ रहा था। कांता बाई की पुत्री उसके घर पर आई जिसका विवाह पास ही के गाँव में किया हुआ था। कांता बाई की हिचकियाँ रुक गयी। अच्छा महसूस करने लग गयी तो उसने अपनी पुत्री को सारा वृत्तांत सुनाया कि कैसे वो हिचकियों में बेचैन हो गई थीं।

पुत्री ने कहा कि माँ मैं तुम्हें सच्चे मन से याद कर रही थी उसी के कारण तुम्हे हिचकियाँ आ रही थी और अब जब मैं आ गयी हूं तो तुम्हारी हिचकियाँ भी बंद हो चुकी हैं।

कांता बाई हैरान रह गयी कि ऐसा भी भला होता है?

पुत्री ने कहा हाँ माँ ऐसा ही होता है जब भी हम किसी अपने को मन से याद करते हैं तो हमारे अपने को हिचकियाँ आने लगती हैं।

कांता बाई ने सोचा कि मैं तो अपने ठाकुर को हर पल याद करती रहती हूँ यानी मेरे लल्ला को भी हिचकियाँ आती होंगी? हाय! मेरा छोटा सा लल्ला हिचकियों में कितना बेचैन हो जाता होगा। नहीं ऐसा नहीं होगा अब से मैं अपने लल्ला को जरा भी परेशान नहीं होने दूँगी और उसी दिन से कांता बाई ने ठाकुर को याद करना छोड़ दिया। अपने लल्ला को भी अपनी पुत्री को ही दे दिया सेवा करने के लिए लेकिन कांता बाई ने एक पल के लिए भी अपने लल्ला को याद नहीं किया। ऐसा करते-करते कई सप्ताह बीत गए।

एक दिन जब कांता बाई सो रही थी तो साक्षात् बाँकेबिहारी कांता बाई के सपने में आए और कांता बाई के पैर पकड़ कर खुशी के आँसू रोने लगते। कांता बाई फौरन जाग जाती है और उठ कर प्रणाम करते हुए रोने लगती है और कहती है कि "प्रभु! आप तो उन को भी नहीं मिल पाते जो समाधि लगाकर निरंतर आपका ध्यान करते रहते हैं फिर मैं पापिन जिसने आपको याद भी करना छोड़ दिया है आप उसे दर्शन देने कैसे आ गए?

बिहारी जी ने मुस्कुरा कर कहा - "माँ! कोई भी मुझे याद करता है तो या तो उसके पीछे किसी वस्तु का स्वार्थ होता है या फिर कोई साधू ही जब मुझे याद करता है तो उसके पीछे भी उसका मुक्ति पाने का स्वार्थ छिपा होता है लेकिन धन्य हो माँ! तुम ऐसी पहली भक्त हो जिसने ये सोचकर मुझे याद करना छोड़ दिया कि कहीं मुझे हिचकियाँ आती होंगी। मेरी इतनी परवाह करने वाली माँ मैंने पहली बार देखी है तभी कांता बाई अपने मिटटी के शरीर को छोड़ कर अपने लल्ला में ही लीन हो जाती है।

*ठाकुरजी आपके दिखावे-चढ़ावे के भूखे नहीं हैं, वे तो केवल आपके प्रेम के भूखे हैं। उनसे प्रेम करना सीखो।*

"जय जय श्री राधे"

"श्री बिहारी जी" कहते हैं कि; यदि आपको कोई प्रतिदिन "राधे राधे" बोलता है तो आप भी उसे "राधे राधे" बोल कर उत्तर दिया करें क्योंकि आप भाग्यशाली हैं जो मैंने आपको मेरे निकट लाने का मेरे भक्त को माध्यम बनाया है!!

🌷जय श्री कुंजबिहारी श्री हरिदास जी।🌷
🌷जय श्री राधे राधे।🌷
🙏🙏
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Surrey Mandir.  भक्ता कांता बाई

वृन्दावन में बिहारी जी की अनन्य भक्त थी। नाम था कांता बाई। बिहारी जी को अपना लाला कहा करती थी। उन्हें लाड दुलार से रखा करतीं और दिन रात उनकी सेवा में लीन रहती थी। क्या मजाल कि उनके लल्ला को जरा भी तकलीफ हो जाए?

एक दिन की बात है कांता बाई अपने लल्ला को विश्राम करवा कर खुद भी तनिक देर विश्राम करने लगीं तभी उसे जोर से हिचकियाँ आने लगीं और वो इतनी बेचैन हो गयी कि उसे कुछ भी नहीं सूझ रहा था। कांता बाई की पुत्री उसके घर पर आई जिसका विवाह पास ही के गाँव में किया हुआ था। कांता बाई की हिचकियाँ रुक गयी। अच्छा महसूस करने लग गयी तो उसने अपनी पुत्री को सारा वृत्तांत सुनाया कि कैसे वो हिचकियों में बेचैन हो गई थीं।

पुत्री ने कहा कि माँ मैं तुम्हें सच्चे मन से याद कर रही थी उसी के कारण तुम्हे हिचकियाँ आ रही थी और अब जब मैं आ गयी हूं तो तुम्हारी हिचकियाँ भी बंद हो चुकी हैं।

कांता बाई हैरान रह गयी कि ऐसा भी भला होता है?

पुत्री ने कहा हाँ माँ ऐसा ही होता है जब भी हम किसी अपने को मन से याद करते हैं तो हमारे अपने को हिचकियाँ आने लगती हैं।

कांता बाई ने सोचा कि मैं तो अपने ठाकुर को हर पल याद करती रहती हूँ यानी मेरे लल्ला को भी हिचकियाँ आती होंगी? हाय! मेरा छोटा सा लल्ला हिचकियों में कितना बेचैन हो जाता होगा। नहीं ऐसा नहीं होगा अब से मैं अपने लल्ला को जरा भी परेशान नहीं होने दूँगी और उसी दिन से कांता बाई ने ठाकुर को याद करना छोड़ दिया। अपने लल्ला को भी अपनी पुत्री को ही दे दिया सेवा करने के लिए लेकिन कांता बाई ने एक पल के लिए भी अपने लल्ला को याद नहीं किया। ऐसा करते-करते कई सप्ताह बीत गए।

एक दिन जब कांता बाई सो रही थी तो साक्षात् बाँकेबिहारी कांता बाई के सपने में आए और कांता बाई के पैर पकड़ कर खुशी के आँसू रोने लगते। कांता बाई फौरन जाग जाती है और उठ कर प्रणाम करते हुए रोने लगती है और कहती है कि प्रभु! आप तो उन को भी नहीं मिल पाते जो समाधि लगाकर निरंतर आपका ध्यान करते रहते हैं फिर मैं पापिन जिसने आपको याद भी करना छोड़ दिया है आप उसे दर्शन देने कैसे आ गए?

बिहारी जी ने मुस्कुरा कर कहा - माँ! कोई भी मुझे याद करता है तो या तो उसके पीछे किसी वस्तु का स्वार्थ होता है या फिर कोई साधू ही जब मुझे याद करता है तो उसके पीछे भी उसका मुक्ति पाने का स्वार्थ छिपा होता है लेकिन धन्य हो माँ! तुम ऐसी पहली भक्त हो जिसने ये सोचकर मुझे याद करना छोड़ दिया कि कहीं मुझे हिचकियाँ आती होंगी। मेरी इतनी परवाह करने वाली माँ मैंने पहली बार देखी है तभी कांता बाई अपने मिटटी के शरीर को छोड़ कर अपने लल्ला में ही लीन हो जाती है।

*ठाकुरजी आपके दिखावे-चढ़ावे के भूखे नहीं हैं, वे तो केवल आपके प्रेम के भूखे हैं। उनसे प्रेम करना सीखो।* 

                          जय जय श्री राधे

श्री बिहारी जी कहते हैं कि; यदि आपको कोई प्रतिदिन राधे राधे बोलता है तो आप भी उसे राधे राधे बोल कर उत्तर दिया करें क्योंकि आप भाग्यशाली हैं जो मैंने आपको मेरे निकट लाने का मेरे भक्त को माध्यम बनाया है!!

                                          🌷जय श्री कुंजबिहारी श्री हरिदास जी।🌷
                    🌷जय श्री राधे राधे।🌷
                               🙏🙏
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